गुरुवार, 4 सितंबर 2014

यूँ ही...

ना पूछ ऐ  मेरे दोस्त  दिल की बात
की अपने भी जख्म दे जाते हैं

हम छुपा के रखते थे
वो कुरेद के चले जाते हैं।।।

बुधवार, 4 जून 2014

ऐ दोस्त.....

जाते जाते इतना तो बता दे ऐ मेरे दोस्त
मैं भूल गया तो क्या तुझे मेरी याद आएगी?

अब तो सो जाओ......

ए रात यूँ ही क्यूँ आ जाती है
क्यूँ मुझको सुला के जाती है

कम से कम उनको सुला दिया कर
जिसको मेरे याद में नीद नहीं आती है ।

शुक्रवार, 21 मार्च 2014

बदलते लोग बदलता रिश्ता........

कल इधर था आज उधर हो गया
ना जाने दोस्त कब दुश्मन बन गया

हम ऐतबार के समंदर में गोते लगाते रहे
कोई खुदगर्ज़ी के खंज़र से वार कर गया

नफरत के गड्डे में धकेल गया
ऐतबार को चुल्लू भर पानी में डुबों गया

कैसे कोई अब तुझ पर विश्वाश करे
खंजर जो मेरी पीठ पर मार गया.......

शुक्रवार, 7 फ़रवरी 2014

हिंदी......

क्या बात है क्या बात हो जाती है कभी कभी 
क्यूँ उनको शर्म आ जाती है हिंदी बोलने में कभी कभी 

हमने तो इतना ही बोला कि बोल दो हिंदी कभी कभी
उन्होंने भी बोला कि हिंदी आती है मुझे कभी कभी 

अब तो ये हाल है मेरे दोस्तों अपमानित हो जाती है
 हिंदी अपने ही देशमे........

मंगलवार, 14 जनवरी 2014

अनुभव........

कभी सोचता था उम्र के साथ बहुत
अनुभव भी ले लिया पर हर दिन जब
एक नयी परिस्थिति से सामना होता है
लगता है अब भी बहुत कुछ सीखना है।

देर से समझा मगर अब समझ गया हूँ
जीवन में कभी कोई परिपूर्ण नहीं होता
यदि दिल  के द्वार मन के आँखें खुले हों
हर दिन कुछ नया सीखने को मिलता।।

रविवार, 5 जनवरी 2014

यूँ ही....

यूँ ही झूठ ही कह देते,
हमें दर्द का एहसास है।
सच में मैं मेरे दर्द को
जानबूझ के यूँ ही भूल जाता ।।

गुरुवार, 14 नवंबर 2013

अच्छा फिर मिलते हैं...........

एक गाँव है जहाँ कुछ घर है मिटटी के
शाम होते ही उन घरो में,
फ़ैल जाती है मध्यम रोशनी |
अक्सर मिल बैठ कर मानते हैं वे लोग
शाम का जश्न |
पहली बार गया था मैं वहां, अपरचित था उनके लिए |
पर कुछ घंटों में वे सब, अपने से लगने लगे |
जब से लौटा हूँ वापस, यही लगता है,
छोड़ आया हूँ अपना ही कोई हिस्सा, उस गाँव में |
एक वे हैं गाँव के सीधे सच्चे लोग
एक हम हैं शहर के पढ़े लिखे लोग
जो पूरी जिंदगी यही करते हैं
कैसे हो ? मैं ठीक हूँ !
अच्छा फिर मिलते हैं ...... नमस्ते......

फिर वही अकेलापन......

फिर वही .हाँ फिर वही 
सूनापन .

फिर वही सड़क पर आते-जाते 
लोगों को देखना एकटक.....

फिर वही घड़ी में बार-बार 
देखना समय......

फिर वही डोर बेल के 
बजने का इंतज़ार....

फिर वही मोबाइल पर 
चेक करना मिस्ड कॉल.......

फिर वही पलंग पर लेटे-लेटे 
पंखे को देखना.....

फिर वही फ़ेसबुक पर 
दोस्त ढूँढना .अपनी पोस्ट को 
कितनों ने लाइक किया, 
अधीर होकर गिनना.....

फिर वही जाने - अनजाने लोगों के 
ट्वीट्स में संवाद तलाशना.....

फिर वही टेबल लैंप का स्विच 
बार - बार ऑन करना 
ऑफ़ करना .सोचने के लिए 
कोई बात सोचना.....

फिर वही डेली सोप में 
मन लगाना .धारावाहिक के 
पात्रों में अपनापन खोजना .
उनकी कहानी में डूबना - उतरना,
उन्ही के बारे में अक्सर सोचना.....

फिर वही टीवी के 
चैनल बदलते रहना .
फिर वही सच्ची - झूठी 
उम्मीद बुनना......

फिर वही हर बीती बात की 
जुगाली करना. फिर वही 
वक़्त की दस्तक सुन कर 
चौंकना......

फिर वही दिन - रात को 
खालीपन के धागे से सीना.....

फिर वही बेचैनी,
अनमनापन.....

फिर वही 
अकेलापन .

रविवार, 3 नवंबर 2013

Happy Dipawali.....


हम ईश्वर से प्रार्थना करते है कि वो आपको और आपके
परिवार को इस दीपावली से अगली दीपावली तक

शान्ति,
शक्ति,
सम्पत्ति,
स्वरुप,
संयम,
सादगी,
सफलता,
समृद्दि,
संस्कार,
स्वास्थ्य,
सम्मान,
सरस्वती,
और स्नेह
प्रदान करे

हमारे तरफ से आप पुरे परिवार को दीपावली की हार्दिक शुभकामना........

लोकप्रिय पोस्ट