ना पूछ ऐ मेरे दोस्त दिल की बात
की अपने भी जख्म दे जाते हैं
हम छुपा के रखते थे
वो कुरेद के चले जाते हैं।।।
ना पूछ ऐ मेरे दोस्त दिल की बात
की अपने भी जख्म दे जाते हैं
हम छुपा के रखते थे
वो कुरेद के चले जाते हैं।।।
ए रात यूँ ही क्यूँ आ जाती है
क्यूँ मुझको सुला के जाती है
कम से कम उनको सुला दिया कर
जिसको मेरे याद में नीद नहीं आती है ।
यूँ ही झूठ ही कह देते,
हमें दर्द का एहसास है।
सच में मैं मेरे दर्द को
जानबूझ के यूँ ही भूल जाता ।।