सोमवार, 9 सितंबर 2013
शनिवार, 7 सितंबर 2013
बुधवार, 17 जुलाई 2013
मर ना सके हम.......
मर ना सके हम तुझसे बिछड़ने के बाद
इस दुनियां में है जी कर क्या करना.......
क्या कहूँ मैं तुझसे बिछड़ने के बाद
तेरी यादों में है जीना बड़ी बात........
इस दुनियां में है जी कर क्या करना.......
क्या कहूँ मैं तुझसे बिछड़ने के बाद
तेरी यादों में है जीना बड़ी बात........
सोमवार, 8 जुलाई 2013
पापा तुम कब आवोगे.......
एक बच्चे की ब्यथा.......
कह कर गए थे पापा
जल्द लौट के आयेंगे.........
हिमालय की पावन छटा से
खिलौना एक लायेंगे........
दर्शन करने चार धाम गए
पुण्य बहुत कमाएंगे.........
संग मम्मी दादी भी गयी
पतित पावनी गंगा में नहलायेंगे.........
छुटियाँ हो रही ख़त्म
कब आ स्कूल पहुचाएंगे.........
मुनिया दीदी कह रही थी
पानी पानी सब हुआ............
पानी में सब वहा बहा
पापा तुम जल्दी कब आवोगे.......
कोई कुछ भी पूछता है...........
कोई जाति पूछता है...........
कोई धर्म पूछता है...........
कोई उम्र तो पूछता है...........
कोई धंधा पूछता है...........
कोई नहीं पूछता...........
मेरा ह्रदय कैसा है...........
मेरा ज्ञान कितना है...........
इमानदार हूँ ...........
या बेईमान हूँ ...........
जैसा दिखता हूँ ...........
वैसा हूँ या बाहर कुछ अन्दर
कुछ और हूँ ...........
निरंतर तुम इंसान हो ...........
या इंसान के रूप में ...........
हैवान हो...........
मन को अच्छा लगेगा ...........
जब कोई ये प्रश्न करेगा...........
कोई धर्म पूछता है...........
कोई उम्र तो पूछता है...........
कोई धंधा पूछता है...........
कोई नहीं पूछता...........
मेरा ह्रदय कैसा है...........
मेरा ज्ञान कितना है...........
इमानदार हूँ ...........
या बेईमान हूँ ...........
जैसा दिखता हूँ ...........
वैसा हूँ या बाहर कुछ अन्दर
कुछ और हूँ ...........
निरंतर तुम इंसान हो ...........
या इंसान के रूप में ...........
हैवान हो...........
मन को अच्छा लगेगा ...........
जब कोई ये प्रश्न करेगा...........
जीने को जी करता है.......
आब ना रुलाओ हमें की दर्द बढ़ने सा लगता है.......
सुखी हुयी पलको में नमी सा होने लगता है........
अब तो हसने की चाहत भी ना रही.......
फिर भी तुम्हे देख कर जीने को जी करता है.......
सुखी हुयी पलको में नमी सा होने लगता है........
अब तो हसने की चाहत भी ना रही.......
फिर भी तुम्हे देख कर जीने को जी करता है.......
दर्पण टूट जाता है......
अक्सर चोट लगने से दर्पण टूट जाता है......
पर छवि वैसे की वैसे ही रहती है.......
ठीक उसी तरह
आदमी से रूठ जाते हैं सभी........
मगर समस्याएं कभी रुठती ही नहीं..........
समस्याएं वैसे की वैसे ही रहती है.......
श्याम विश्वकर्मा
पर छवि वैसे की वैसे ही रहती है.......
ठीक उसी तरह
आदमी से रूठ जाते हैं सभी........
मगर समस्याएं कभी रुठती ही नहीं..........
समस्याएं वैसे की वैसे ही रहती है.......
श्याम विश्वकर्मा
मंगलवार, 2 जुलाई 2013
सुनो लड़की......
आजकल की लड़कियां जिन्हें कच्ची उम्र में प्यार करने का शौक होता है वह कितना भयानक होता है. अक्सर लड़कियां चौदह पन्द्रह साल की उमर में प्यार की गलियों की सैर करनीलगती हैं जिसके परिणाम बेहद घातक साबित होते है.
आजकल का विषय बलात्कार है जिसकी एक वजह शायद कहीं ना कहीं लड़कियां का अधिक भोलापन भी है जिसकी वजह से वह बहुत जल्दी भटक जाती हैं. फिलहाल आप इस कविता के मर्म को समझिए, हो सकता है आपको भी कवि की भावना समझ आ जाए.......
आजकल का विषय बलात्कार है जिसकी एक वजह शायद कहीं ना कहीं लड़कियां का अधिक भोलापन भी है जिसकी वजह से वह बहुत जल्दी भटक जाती हैं. फिलहाल आप इस कविता के मर्म को समझिए, हो सकता है आपको भी कवि की भावना समझ आ जाए.......
" सुनो लड़की "
अभी तुम इश्क मत करना,
अभी गुड़िया से खेलो तुम,
तुम्हारी उम्र ही क्या है,
अभी मासुम बच्ची हो,
नहीं मालूम अभी तुमको,
कि जब ये इश्क होता है,
तो इंसान कितना रोता है,
सितारे टूट जाते हैं, सारे छुट जाते है,
सहारे छुट जाते हैं,
अभी तुमने नहीं कि जब साथी बिछड़ते हैं,
तो कितना दर्द होता है,
हजारों गम उभरते हैं,
हजारों जख्म खुलते हैं,
सुनो लड़की मेरी मानो पढ़ाई पर तवज्जों दो,
किताबों में गुलाब को नहीं रखना,
किताबें जब भी खुलेंगी तो ये कांतो कि तरह दिल में चुभने लगेगी,
किसीको खत मत लिखना,
लिखाई पकड़ी जाती है,
बड़ी रुसवाई होती है,
किसीको फोन मत करना,
वो आवाजें सताती हैं,
मेरी नज्में नहीं पढ़ना,
ये तुम्हें पागल बना देंगी,
सुनों लड़की मेरी मानो तुम अभी इश्क मत करना,
अपनी तकदीर से तुम खुलके मत लड़ना
अभी तुम गुड़िया से खेलो,
अभी तुम इश्क मत करना........
" श्याम विश्वकर्मा "
मैं एक कोशिश कर रहा हूँ..............
मैं एक कोशिश कर रहा हूँ सरहदें पाटने की..............
मैं एक कोशिश कर रहा हूँ दूरियां मिटाने की..............
मैं एक कोशिश कर रहा हूँ उस फासले को काटने की..............
मैं एक कोशिश कर रहा हूँ सबको अपना बनाने की..............
मैं एक कोशिश कर रहा हूँ एक खुला आस्मान बनाने की..............
मैं एक कोशिश कर रहा हूँ एक नयी दुनिया बनाने की..............
मैं एक कोशिश कर रहा हूँ अपना विश्वकर्मा समाज बनाने की..............
मैं कोई ग़ैर नही तुम्हारा अपना ही हूँ..............
बस वक्त ने हमारे बीच यह फासला बो दिया है..............
मुझे मत रोको, मेरे जज्बातों, मेरे ख्यालों, मेरे ख्वाबों को उड़ने दो..............
मैं एक कोशिश कर रहा हूँ..............
बस एक कोशिश.............. " श्याम विश्वकर्मा "
मैं एक कोशिश कर रहा हूँ दूरियां मिटाने की..............
मैं एक कोशिश कर रहा हूँ उस फासले को काटने की..............
मैं एक कोशिश कर रहा हूँ सबको अपना बनाने की..............
मैं एक कोशिश कर रहा हूँ एक खुला आस्मान बनाने की..............
मैं एक कोशिश कर रहा हूँ एक नयी दुनिया बनाने की..............
मैं एक कोशिश कर रहा हूँ अपना विश्वकर्मा समाज बनाने की..............
मैं कोई ग़ैर नही तुम्हारा अपना ही हूँ..............
बस वक्त ने हमारे बीच यह फासला बो दिया है..............
मुझे मत रोको, मेरे जज्बातों, मेरे ख्यालों, मेरे ख्वाबों को उड़ने दो..............
मैं एक कोशिश कर रहा हूँ..............
बस एक कोशिश.............. " श्याम विश्वकर्मा "
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