बुधवार, 20 मई 2015

आजकल राख से जल जाता हूँ......

रोज गिरता हूँ ,सँभल जाता हूँ.... वक्त के साथ बदल जाता हूँ.... भीड काफी है उनकी महेफिल में..... चल किसी ओर निकल जाता हूँ..... तुम बिना बात खौफ खाते हो..... जाने क्यों मैं भी दहल जाता हूँ ..... यार तुम कल सवाल कर लेना..... आज कुछ देर को टल जाता हूँ..... कल सुबह होगी लोग कहते हैं..... रोज सुनता हूँ बहल जाता हूँ..... आग तो आग है ,न जाने क्यों...... आजकल राख से जल जाता हूँ...... आजकल राख से जल जाता हूँ......
एक टिप्पणी भेजें

लोकप्रिय पोस्ट