बुधवार, 20 मई 2015

कैसे करूँ माँ बखान......



एक मित्र ने कहा ~ ~ माँ के बारे में .. करो कुछ बखान ..
पर क्यों लिखूँ .. और क्यों करूँ .. माँ की महिमा का बखान .. !!
इस पृथ्वी पर .. कौन है ऐसा .. जो है .. माँ की महानता से अंजान ..
और फिर माँ ~ माँ की ममता ~ तो होती है ~ इतनी महान ..
शब्दों में .. किया जा सके चित्रण .. शब्दों की कहाँ है इतनी उङान ..!!
हर प्राणी की .. जीवन से .. जगत से .. करवाती है जो पहचान ..
हर प्राणी के होने में .. अस्तित्व में .. जिसका होता है सर्वाधिक योगदान ..
हिमालय के उत्तुंग शिखर सी .. होती है उच्च .. जिस माँ की शान ..
छोटे छोटे पंख वाले शब्दों के पंछी .. कैसे करवाये उस शिखर का भान .. !!
वो माँ ~ जो अपनी संतान के मंगल का .. सदा चाहती है वरदान ..
वो माँ ~ जो अपनी ममता का आँचल .. सदा ही रखती है तान ..
वो माँ ~ जो संतान को .. अमृत भी पिलाये .. तो पहले लेती है छान ..
वो माँ ~ जो सभी संतानों को .. बिना फर्क के .. रखती है एक समान ..
वो माँ ~ जो अपना सुख चैन .. कर देती है संतान के लिये कुर्बान ..
वो माँ ~ जो सदा चाहती है .. कि उसकी संतान हो महान .. गुणवान .. !!
ओ माँ ~ मेरे हृदय में .. सदा ही है तेरा ~ ~ ईश्वर तुल्य स्थान ..
ओ माँ ~ तू ही बता .. मेरी लेखनी .. कैसे करे माँ की महिमा का बखान .. !!
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