सोमवार, 31 अक्तूबर 2011

फेसबुक - Facebook......


मेरे जीने का सहारा फेसबुक
मेरे मरने का सहारा फेसबुक
सुबह हुई फेसबुक
दोपहर हुई फेसबुक
शाम आई फेसबुक
रात होने को है फेसबुक

बत्ती गुल, मोबाईल पे चलता है फेसबुक
कोई नया बन्दा आया दुनिया में
खबर देता है फेसबुक
मरने की घड़ी है
Status अपडेट करता है फेसबुक

पापा ने पूछा 'खाना खा लो"
मम्मी ने कहा- 'बेटा पानी पी लो'
But वो तो Busy है सिस्टर को दिखाने में फेसबुक

कभी पेज Create करता है
कभी बनता है किसी ग्रुप का Admin
बस उसे तो मतलब है
Like और Comments से
न शादी से न टेंट से
you Tube पे जाके करता है
Share कोई गाना
नहीं परवाह
सुने चाहे मामा, सुने चाहे नाना

क्लास में है फेसबुक
घर में है फेसबुक
wash रूम में है फेसबुक
उल- जुलूल फोटो करता है Tag
चाहे क्लास में भूल जाये अपना Bag

जानता है-
नज़र भर नहीं देखी उसकी Applications
फिर भी बार-बार चैक करता है Notifications
घर भर के Profile बना डाले उसने
कभी इससे Log In करता है
कभी उससे Log In करता है
पर नज़रों में रहता है बस फेसबुक

कहाँ रही वो ज़मीनी हकीकतें
कहाँ रहे वो संस्कार
न रहा वो प्रेम
न रहा शाश्वत प्यार
फेसबुक का इंसान खुश है
देख कर Virtual संसार..........
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