शुक्रवार, 5 अगस्त 2011

मेरा मन बेचैन है.....


सच ! मन नहीं लगता
जब मन उदास होता है
एक अजीब-सी बेचैनी होती है !!!
सांथ सांथ ! हर घड़ी, हर पल
सन्नाटा-सा छाया होता है !!!
हमारे आस-पास
हम चाहते हैं, बार बार चाहते हैं
दूर हो बेचैनी, हमसे !!!!

पर

हर प्रयास की तरह
नया प्रयास भी
असफल-सा होता है !!
हम घिरे होते हैं, घिर चुके होते हैं
बेचैनी से !
वक्त के संग लड़ रहे होते हैं
जी रहे होते हैं हम !!!

पल-पल उम्मीदों के सांथ !
न चाहकर, न चाहते हुए
हर घड़ी, हर पल, बेचैनी में !!!!!
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