शुक्रवार, 29 जून 2012

कितना अच्छा होता की हम फिर से बच्चे बन जाते.......


कितना अच्छा होता की हम फिर से बच्चे बन जाते.......
रोज सुबह माँ के हमें जगाती......
रोज रोते रोते हम पढ़ने जाते.........
गाँव में गिल्ली डंडा खेलता...........
दोस्तों के साथ कबड्डी खेलता......
कितना अच्छा होता की हम फिर से बच्चे बन जाते.......
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