लो लौट आया हुँ मैं
हारा नहीं था मैं
बस कुछ पल के लिए ठहरा था
कोशिश बहुत की ज़माने ने मुझे रोकने की
मैं हर मुश्किल को छोड़ आया हुँ
वक्त के साथ थोड़ा खो गया था मैं
मस्त नींद मे कुछ पल सो गया था मैं
दुनियाँ में मद मस्त हो गया था मैं
अब फिर मैं सब कुछ छोड़ आया हुँ
लो फिर लौट आया हुँ मैं......
लो फिर लौट आया हुँ मैं......
एक बहता हुआ हवा हूं, बहकर फिर, से लौट जाऊंगा मैं
दूर कहीं उन सितारों में, फिर से खो जाऊंगा मैं
एक गहरी नींद में, जाने कब सोया था मैं
फिर उस गहरी नींद में सोने चला जाऊंगा मैं
फिर से लौट जाऊंगा मैं......
हाँ फिर से लौट जाऊंगा मैं......
श्याम विश्वकर्मा @ShyamV_
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