गर मैं अपनी चाहतों का हिसाब करने जो बैठ जाऊं.....
तुम तो मेरा याद करना भी ना लौटा सकोगे....
मंगलवार, 14 जून 2016
लौटा दो.....
रविवार, 22 मई 2016
रूठे हुये.....
मंगलवार, 26 अप्रैल 2016
जीवन किसे कहते है ?
एक ब्यक्ति ने महात्मा जी से पूछा, "जीवन क्या है?"
महात्मा जी ने एक बहुत ही उत्तम जबाब दिए.......
जब मनुष्य जन्म लेता है तो उसके पास सांसे तो होती हैं पर कोई नाम नहीं होता और जब मनुष्य की मृत्यु होती है तो उसके पास नाम तो होता है पर सांसे नहीं होती। इसी सांसे और नाम के बीच की यात्रा को "जीवन" कहते हैं।
शनिवार, 12 मार्च 2016
तन्हां....
माना कि दूरियां कुछ बढ़ सी गयी हैं लेकिन...
तेरे हिस्से का वक्त आज भी...तन्हा ही गुजरता है....
मुद्दतों बाद....
मुदत बाद जब उसने कहा ” तुझे भुल जाना चाहती हूँ मैं….
आसूं आ गए आखों में ये सोच कर कि इसे अब तक याद हुं मैं.....
बुधवार, 10 फ़रवरी 2016
जाने भी दो....
चलो अब जाने भी दो..क्या करोगे दासता सुनकर..,
ख़ामोशी तुम समझोगे नहीं,और बयां हमसे होगी नहीं…
बुधवार, 20 जनवरी 2016
जंगलों के उस पार.....
किन बेदर्द लोगोंको अपना दुःख सुनारहा हूँ.......
पेड़ों से लिपटकर कोई कब तक रोये आख़िर.......
इसलिये अब जंगलों के उस पार जा रहा हूँ......
बुधवार, 6 जनवरी 2016
हाँ मैं असहिष्णु हूँ.....
हाँ मैं असहिष्णु हूँ.....
जब देश में आतंकी हमला करते हैं तब आमिर खान को डर नहीं लगता।
हाँ मैं असहिष्णु हो गया हूँ.....
जब बंगाल में हजारों का झुण्ड पुलिस स्टेसन और गाड़ियों में आग लगा देते हैं घरों में लूटपाट करते हैं तब कोई बुद्धजीवि अवार्ड वापसी नहीं करता।
हाँ मैं असहिष्णु हो जाता हूँ.....
जब संसद नहीं चले दिया जाता है सिर्फ एक परिवार को बचाने के लिए जो लगातार कितने दशकों से सिर्फ देश को लूटने का कार्य करते आये हैं।
असहिष्णुता का हद तो तब पार ही हो जाता है जब इस देश का दलाल मिडिया एकतरफा खबर दिखता है और जी करता है की इनके कान के निचे जम के थप्पड़ जड़ दिया जाये।
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