गर मैं अपनी चाहतों का हिसाब करने जो बैठ जाऊं..... तुम तो मेरा याद करना भी ना लौटा सकोगे....
एक टिप्पणी भेजें
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें