रविवार, 14 जुलाई 2019

अंत मे हम दोनों ही होंगे...

भले ही झगड़े, गुस्सा करे,
एक दूसरे पर टूट पड़े
एक दूसरे पर दादागिरि करने के
लिये, अन्त में हम दोनों ही होंगे


जो कहना हे, वह कह ले,
जो करना हे, वह कर ले
एक दुसरे के चश्मे और
लकड़ी ढूँढने में,
अन्त में हम दोनों ही होंगे


मैं रूठूं तो तुम मना लेना,
तुम रूठो ताे मै मना लूँगा
एक दुसरे को लाड़ लड़ाने के लिये,
अन्त में हम दोनों ही होंगे


आँखे जब धुँधली होंगी,
याददाश्त जब कमजोर होंगी
तब एक दूसरे को एक दूसरे
मे ढूँढने के लिए,
अन्त में हम दोनों ही होंगे


घुटने जब दुखने लगेंगे,
कमर भी झुकना बंद करेगी
तब एक दूसरे के पांव के नाखून काटने के लिए,
अन्त में हम दोनों ही होंगे


“मेरी हेल्थ रिपोर्ट एक दम नॉर्मल
है, आइ एम आलराईट
ऐसा कह कर ऐक दूसरे को
बहकाने के लिए,
अन्त में हम दोनों ही होंगे


साथ जब छूट जायेगा,
बिदाई की घड़ी जब आ जायेगी
तब एक दूसरे को माफ करने के लिए,
अन्त में हम दोनों ही होंगे…


सोमवार, 29 अप्रैल 2019

दिशाशूल विचार यात्रा...

दिशाशूल विचार यात्रा करने से पहले जरूर जान लें – दिशाशूल के ऊपर एक पुरानी कहावत है।


सोम शनीचर पूरब न चालू। मंगल बुध उत्तर दिश कालू।
रवि शुक्र जो पश्चिम जाय। हानि होय पथ सुख नहीं पाए।
बीफे दक्खिन करे पयाना। फिर नहिं समझो ताको आना।

  • सोमवार और शनिवार को पूर्व दिशा की ओर यात्रा नहीं करनी चाहिए।
  • मंगलवार और बुधवार को उत्तर दिशा की ओर यात्रा नहीं करनी चाहिए।
  • रविवार और शुक्रवार को पश्चिम दिशा दिशा की ओर यात्रा नहीं करनी चाहिए।
  • वीरवार या बृहस्पति को दक्षिण दिशा की और यात्रा करना बहुत ही खतरनाक होता है।

मंगलवार, 9 अप्रैल 2019

बदले की कार्यवाही...

यह खबर मेरी पसंद की है... समाचारों के अनुसार "अब जाकर" काँग्रेस ने तय किया है कि वे भी मध्यप्रदेश में १५ वर्षीय मामाजी कार्यकाल के तमाम घोटालों और अनियमितताओं के खिलाफ FIR, छापे और जाँच आरम्भ करेंगे... धन्यवाद मोदीजी...

कई वर्षों से मेरी यह चाहत रही है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ बिलकुल सरेआम "बदले की कार्यवाही" जैसी कार्यवाही होनी चाहिए... अभी तक ये होता था कि काँग्रेस और भाजपा के ऊँचे लेवल के नेता आपस में मिलजुलकर माल खाते थे (व्यापम इसका साक्षात उदाहरण है), और जो भी पार्टी सत्ता में आती थी, वह दूसरे के खिलाफ कुछ नहीं करती थी...

लंबी प्रतीक्षा के बाद अब पिछले पाँच वर्षों के मोदीजी के कारनामे की वजह से काँग्रेस बिलकुल हताश-निराश-उद्विग्न-असंतोषी-क्रोधी बन चुकी है... इसलिए अब मुझे पूरी उम्मीद है कि ये दोनों प्रमुख पार्टियाँ जब-जब, जहाँ-जहाँ, जैसे-जैसे सत्ता में आती जाएँगी... अपने विपक्षी पार्टी के कपड़े उतारने और चोरों को पकड़ने का पूरा प्रयास करेंगी... (बशर्ते इन दोनों में कोई गुप्त समझौता न हो जाए).

मोदीजी का एक बार पुनः धन्यवाद... पहले नोटबंदी करके... फिर आधार कार्ड को तमाम योजनाओं से जोड़कर दल्ल्लों को खत्म करके... फिर एक-एक करके सफाई से कई कांग्रेसियों को जेल के दरवाजे अथवा जमानत तक पहुंचाकर उन्होंने ही यह स्थिति पैदा की है. अब काँग्रेस को जब भी मौका मिलेगा, वह भाजपा से बदला लेगी...

मेरे जैसे सामान्य और मामूली व्यक्ति की सदा से यही इच्छा रही है कि सभी प्रकार के भ्रष्टाचारियों को पकड़ो... उन्हें कोर्ट में खींचो... अब "चोर-चोर-मौसेरे भाई" आपस में दुश्मन बन रहे हैं... यानी बहुत मजा आएगा... बहुत ही मजा आएगा...

मोबाइल कंपनियां

अगर आपको लगता है इसमें सच्चाई है तो कृपया अधिक से अधिक शेयर कर के इसे सरकार तक पहुंचाएं...
 
कहीं ऐसा तो नहीं इंटरनेट मुहैया करवाने वाली कुछ लुटेरी (आइडिया, वोडाफोन, एयरटेल) जैसी लुटेरी कंपनियों ने ट्राई के अधिकारीयों के मुहं में हड्डी ठूंस दी है, जिससे इनको जनता को मिलने वाली मुफ्त सुविधा देखना इनकी आँख की किरकिरी बन चुका है,
अब जियो वाले अपने ग्राहकों को कितने पैसे में कितना टॉकटाइम या डेटा दे रहे हैं.. इससे ट्राई वाले को क्या मुसीबत हो गयी ? ? ट्राई ने आदेश दिया है कि जियो वाले "समर छूट" 3 महीने नहीं बढ़ा सकते.. यहां तक कि प्राइम ऑफर अप्रैल तक ही करवाने को था तो 15 दिन का एक्सटेंशन क्यों दिया गया ? ?

ना जाने कितने सालों से एयरटेल, वोडाफोन, आईडिया, aircel आदि करोड़ों लोगों की गाढ़ी कमाई को चूस रही थी.. करोडो लोगों का एक ही दिन में कोई प्लान एक्टिवेट करके 30 रूपये बिना बताए काट लेती थी... जो मर्जी आये वैसे टॉकटाइम का रेट रखती थी... कोई भी 250 के आसपास ही एक gb डाटा देता था.. अरबों खरबों की लूट जारी थी.. तब ट्राई वालों ने जनता के दुःख दर्द को नहीं सुना.. इस लूट में से ट्राई के अफसर भी करोड़ों रूपये खाते रहे और अंधे बने रहे...

मैंने यूँही हिसाब लगाया था.. कि अगर 30 रूपये 1 लाख ग्राहक का एक बार में कट जाए तो एक झटके में 3000000 रूपये हो जाते हैं.. किसी opertor के पास एक करोड़ ग्राहक हैं और वो इस तरह से हर दिन कोई ना कोई घपला करके 30 लाख या 50 लाख कमाये तो सोचिये ये कितना बड़ा लूट है... बहुत मामले में तो आपके पास 50 रूपाये का बैलेंस है और कंपनी ने एक लाख ग्राहक के सिर्फ 5 रूपये भी काट लिए तो सोचिये कितने हो गए.. ग्राहक भी सोचता है.. मैंने ही कुछ कॉल किया होगा.. या संशय में पड़ कर ज्यादा नहीं सोचता... और फिर कौन सा ग्राहक 5 या 10 या 30 रूपये के लिए कोर्ट में जाकर इनसे लड़ेगा.. ? ज्यादातर लोगों को तो पता ही नही चलता कि उनका पैसा कट गया है ..

लेकिन आज जब जियो वाले ने देश के दूरसंचार घोटाले को सफलता पूर्वक बंद कर दिया तो... ट्राई वालों को भारतीय जनता की ये ख़ुशी देखी नहीं जा रही... जाहिर है विपक्षी ऑपरेटरों ने ऐसे गलत फैसले दिलवाने के लिए ट्राई के घूसखोर अफसरों तक बड़ी रकम पहुंचाई होगी...

सोमवार, 8 अप्रैल 2019

राफेल और कांग्रेस...

राफेल✈ का मामला असली में हैं क्या, लास्ट लाईन तक जरूर पढ़ें, तभी समझ मे आ पायेगा ...

बात शुरू होती हैं वाजपेयी सरकार से तब अटलजी के विशेष अनुरोध पर भारतीय वैज्ञानिकों ने ब्रम्होस 🚀मिसाइल तैयार की थी।

ब्रम्होस 🚀की काट आज तक दुनियां का कोई देश तैयार नही कर सका हैं।

विश्व के किसीं देश के पास अब तक ऐसी कोई टेक्नोलॉजी विकसित नही हुई जो ब्रम्होस को अपने निशाने पर पहुंचने से पहले रडार पर ले सके।

अपने आप मे अद्भुत क्षमताओं को लिये ब्रम्होस ऐसी परमाणु मिसाइल हैं जो 8000 किलोमीटर के लक्ष्य को मात्र 140 सेकेंड में भेद सकती हैं।

और चीन के लिये ब्रम्होस की यह लक्ष्य भेदन क्षमता ही सिरदर्द बनी हुई हैं।

न चीन आजतक ब्रम्होस की काट बना सका हैं न ऐसा रडार सिस्टम जो ब्रम्होस को पकड़ सके।

अटलजी की सरकार गिरने के बाद सोनियां के कहने पर कांग्रेस सरकार ने ब्रम्होस को तहखाने में रखवाकर आगे का प्रोजेक्ट बन्द करवा दिया।

जिसमें ब्रम्होस को लेकर उड़ने वाले फाइटर जेट विमान तैयार करने की योजना थी जो अधूरा रह गया।

दस वर्षों बाद जब मोदी सरकार आई तब तहखाने में धूल गर्द में पड़ी ब्रम्होस को संभाला गया वह भी तब! जब मोदी खुद भारतीय सेना से सीधा मिले तो सेना ने तब व्यथा बताई !

वर्तमान में ब्रम्होस को लेकर उड़ सके ऐसा सिर्फ एक ही विमान हैं और वह हैं राफेल ✈!

जी हाँ दुनियाभर में सिर्फ राफेल ✈ ही वो खूबियां लिये हुए हैं जो ब्रम्होस को सफलतापूर्वक निशाने के लिये छोड़कर वापिस लेंड करके मात्र 4 मिनट में फिर अगली ब्रह्मोस को लेकर दूसरे ब्लास्ट  को तैयार हो जाये।

मोदी ने फ्रांस से डील करके राफेल✈ को भारतीय सेना तक पहुंचाने का काम कर दिया और यहीं से असली मरोड़ चीन और उसके पिट्ठू वामपंथीयों को हुई।

इसमें देशद्रोही पीछे कैसे रहते! जो विदेशी टुकड़ो पर पलने वाले गद्दार अपने आका चीन के नमक का हक अदा करने मैदान में उतर आये ।

खैर ..शायद भारतीय सेना और मोदी दोनों इस तरह की आशंका को भांप गये तो राफेल✈ के भारत पहुंचते ही उसका ब्लेकबॉक्स सहित पूरा सिस्टम निकाला गया।

राफेल ✈ के कोड चेंज कर के उस में भारतीय कम्प्यूटर सिस्टम डाला गया जो राफेल ✈ को पूरी तरह बदलने के साथ उसकी गोपनीयता बनाये रखने में सक्षम था।

लेकिन बात यहीं नही रुकी राफेल✈ को सेना के सुपुर्द करने के बाद सरकार ने सेना को उसे अपने हिसाब से कम्प्यूटर ब्लेकबॉक्स और जो तकनीक सेना की हैं उसे अपने हिसाब से चेंज करने की छूट दे दी।

जिससे सेना ने छूट मिलते ही मात्र 48 घण्टो में राफेल ✈ को बदलकर रख दिया, जिससे चीन जो राफेल ✈ के कोड और सिस्टम को हैक करने की फिराक में था वह हाथ मलते रह गया।

फिर चीन ने अपने पाले वामपंथी कुत्तों को राफेल ✈ की जानकारी लीक करके उसतक पहुंचाने काम सौंपा गया।

भारत भर की मीडिया में भरे वामपंथी दलालों ने राफेल ✈ सौदे को घोटाले की शक्ल देने की नाकाम कोशिश की ताकि सरकार या सेना विवश होकर सफाई देने के चक्कर मे इस डील को सार्वजनिक करें।

जिससे चीन अपने मतलब की जानकारी जुटा सके पर सरकार और सेना की सजगता के चलते दलाल मीडिया का मुंह काला होकर रह गया तब!

फिर अपने राहुलगांधी मैदान में उतरे चीनी दूतावास में गुपचूप राहुलगांधी ने मीटिंग की उसके बाद राहुलगांधी ने चीन की यात्रा की और आते ही राफेल ✈ सौदे पर सवाल उठाकर राफेल ✈ की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग जोरशोर से उठने लगी।

पूरा मीडिया सारी कोंग्रेस की दिलचस्पी सिर्फ और सिर्फ राफेल ✈ की जानकारी सार्वजनिक कराने में हैं ताकि चीन ब्रम्होस 🚀 का तोड़ बना सके पर ये अबतक सम्भव नही हो पाया जिसका श्रेय सिर्फ कर्तव्यनिष्ठ भारतीय सेना और मोदीजी को जाता हैं। 

चीन ब्रम्होस की जानकारी जुटाने के चक्कर मे सीमा पर तनाव पैदा करके युद्ध के हालात बनाकर देख चुका हैं पर भारतीय सेना की चीन सीमा पर ब्रम्होस की तैनाती देखकर अपने पांव वापिस खेंचने को मजबूर हुआ था।

डोकलाम विवाद चीन ने इसीलिये पैदा किया था ताकि वह ब्रम्होस 🚀 और राफेल✈ की तैयारी देख सके ...

इधर कुछ भटके हुए लोग राहुलगांधी को प्रधानमंत्री पद के योग्य समझ रहें हैं जो खुद भारत की गोपनीयता और सुरक्षा को शत्रु देश के हाथों उचित कीमत पर बेचने को तैयार बैठा हैं ।

नेहरू ने भी लाखों किलोमीटर जमीन चीन को बेची थी और जनता समझती हैं भारत युद्ध हार गया । 

आज ये राफेल ✈ और ब्रम्होस 🚀 ही भारत के पास वो अस्त्र हैं जिसके आगे चीन बेबस हैं !

मेरा बस चले तो मैं इस पोस्ट को 40 सेकंड में 100 लोगों तक पंहुचा दूं ...

किंतु आप सभी शेयर करके और मित्रों तक पहुचाएं।
  🙏🏻एक सच्चा राष्ट्रभक्त🙏🏻
🚩🇮🇳🚩🇮🇳🚩🇮🇳🚩🇮🇳🚩

शुक्रवार, 28 दिसंबर 2018

LANCO के बारे में....

LANCO का फुल फॉर्म क्या है..??

अब आप कहेंगे कि LANCO का क्या फुल फॉर्म होना..? LANCO मतलब LANCO इंफ्राटेक, जिसका दिल्ली गुड़गांव के रजोकरी बॉर्डर पर उद्योग विहार की पॉश जमीन पर ऑफिस है।

LANCO का फुल फॉर्म है, 'L'agadapati 'A'marappa 'N'aidu and 'CO'mpany. अब ये एल. अमरप्पा नायडू कौन है जिनके नाम के शब्दों से ये कंपनी बनी है..? तो साहब, ये लगदापति अमरप्पा नायडू, L. राजगोपाल के बड़े पिताजी है (पिताजी के बड़े भाई), जिसके नाम पर इनके भतीजे राजगोपाल ने वर्ष  1991 में LANCO शुरू की। अब आप पूछेंगे ये राजगोपाल कौन है..??

लगदापति (L) राजगोपाल तत्कालीन संयुक्त आंध्रप्रदेश से एक उद्योगपति और कांग्रेस नेता है, जो मौन-मोहन सिंह के UPA2 में विजयवाड़ा से कांग्रेस सांसद भी रह चुके हैं। राजगोपाल के पास कंपनी के मेजर शेयरहोल्डिंग रही, जबकि उनके भाई  मधुसूदन राव कंपनी के चेयरमैन बने। इस पूरी कहानी में याद रखियेगा कि एक जमाने में आंध्रप्रदेश में कांग्रेस का दबदबा होता था। तब YSR रेड्डी कांग्रेस की तरफ से आंध्र के मुख्यमंत्री थे, और तेलुगुदेशम के चंद्रबाबू नायडू चुनाव हारे विपक्ष में बैठे थे। फिर तेलंगाना वाला मूवमेंट हुआ तो राजगोपाल ने राज्य के विभाजन के विरोध में फरवरी14 में संसद से इस्तीफा दे दिया। ये बात और है कि तब तक LANCO को सरकारी बैंकों से 44,000 करोड़ का कर्जा मिल चुका था। जी हां, 44,000 करोड़।

सरकार बदली, चौकीदार आया। उसने कहा, पैसा लौटाना पड़ेगा, नहीं तो हलक में हाथ डाल के निकाल लूंगा। राजगोपाल और मधुसूदन राव को लगा, सेटिंग हो जाएगी, एक जमाने में तूती बोलती थी। पर ऐसा कुछ हुआ नहीं। Insolvency and Bankruptcy Code आया, और सबसे पहले 12 बड़े कॉरपोरेट लोन की बात आई तो राजगोपाल की कंपनी LANCO उसमें से एक थी। आप आज अगर कंपनी की वेबसाइट पर जाकर देखेंगे तो पाएंगे कि जो 44,000 करोड़ बकाया है बैंकों का, उसमें से मोटामोटी 38,000 करोड़ unsecured है, मतलब बिना किसी संपत्ति, बिना किसी गारंटी दिया हुआ है।
एक 10 लाख के होमलोन में भी सारी जमीन के कागज बैंकों के पास रहते हैं, यहां 2004 से 2014 तक lanco को 40,000 करोड़ किसी asset-backed ना होने के बावजूद मिल गए। अब कैसे मिले, ये तो वो बैंक के अधिकारी ही बता पाएंगे जिनको गूंगे प्रधानमंत्री के बोलते मिनिस्टरों से फ़ोन आये। और आज उसी कंपनी का 72 रुपये का शेयर 30 पैसे का हो गया है।

आज की तारीख में LANCO liquidation में हैं, और माल्या, चौकसी की क्या बात करें, ये घर में बैठे 'राज'-गोपालों का पैसा वापस लाना भी मोदी की ही जिम्मेदारी है। बाकी, थोड़ा सा google को कष्ट देंगे तो आपको ये भी पता चल जाएगा कि कैसे Air India के सारे प्रॉफिटेबल रूट और टाइमिंग धीरे धीरे माल्या की किंगफिशर को ट्रांसफर होते गए। Air India बर्बाद होती रही, और माल्या उस पैसे से लंदन में संपत्ति खरीद कैलेंडर बनाता रहा। थोड़ा और गूगलेंगे तो माल्या के पिछली सरकार के उड्डयन मंत्री प्रफ्फुल पटेल के साथ तस्वीर भी मिलेगी, जिसमें सिर्फ 3 लोग - पटेल, शरद पंवार और विदेश मंत्री SM कृष्णा - के लिए एक बड़ा प्लेन चल रहा है, जो बाकी पूरा खाली है। किस तरह से बैंकों का पैसा चमचों ने चोरी का पहला भोग परिवार को चढ़ाते हुए जबरदस्त लूट मचाई,  थोड़ा दिमाग लगाने पर सोचने से सिहरन उठ जाती है। आप कोई भी घोटाला उठाएंगे, कहीं ना कहीं कांग्रेस का 'हाथ' दिख ही जायेगा - LANCO इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है।

ऐसे में जब खानदानी चोर 'चौकीदार चोर है' का नारा देते हैं तो फिर भी समझ में आता है। यहां सोशल मीडिया पर जब परिवार के चरण-चाटुकारों को ये नारा लगाते देखता हूँ तो सोचता हूँ, इतनी नफरत के लिए कितनी शिद्दत से इन्होंने अपने ज़मीर को मारा होगा।

बाकी, आप सोचिएगा, क्या चौकीदार चोर है..

सोमवार, 24 सितंबर 2018

रुपया / डॉलर

        आज 1 डॉलर की कीमत लगभग 70 रुपए से भी अधिक है, लेकिन अगर में कहूँ की एक समय एक रुपए की कीमत 13 डॉलर के बराबर हुवा करती थी तो शायद कुछ लोगों को यकीन नही होगा,

        भारत में करंसी का इतिहास 2500 साल पुराना हैं। बात सन 1917 की है जब 1 रुपया 13 डॉलर के बराबर हुआ करता था। फिर 1947 में भारत आजाद हुआ, 1 रूपया 1 डॉलर कर दिया गया। आजादी के वक्‍त देश पर कोई कर्ज नहीं था। 1951 में पहली पंचवर्षीय योजना के लिए सरकार ने कर्ज लिया। 1948 से 1966 के बीच एक डॉलर 4.‍66 रूपए के आसपास रहा। 1975 में एक डॉलर 8.39 रूपए, 1985 में एक डॉलर 12 रूपए।
1991 में बेतहाशा मंहगाई, विकास दर कम होना और फॉरेन रिर्जव कम होने से एक डॉलर 17.90 रूपए पर पहुंच गया।1993 में एक डॉलर 31.37 रूपए। 2000-2010 के दौरान यह एक डॉलर की कीमत 40-50 रूपए तक पहुंच गई। 2013 में तो यह हद पार हो गई और यही एक डॉलर की कीमत लगभग 70रूपए तक पहुंच गई।

        मेरा देश महान था, और सोने की चिड़या भी था लेकिन आज सब महँगाई का रोना रोते है उसकी वजह नही जानते, किसी कांग्रेसी से पूछो की जब देश आजाद हुआ था तब 1रुपये और डॉलर बराबर थे उसके बाद कांग्रेस  नें विकास की ऐसी लड़ी लगाई की आज डॉलर रुपए के सर पे जाके बैठा है, कांग्रेस के पास मौका भी था दस्तूर भी लेकिन देश का विकास नही किया किया तो सिर्फ विनाश, वरना नोटेबन्दी जैसा कदम अगर कांग्रेस ने पहले उठा लिया होता तो आज भ्रस्टाचार पर लगाम कस ली होती,

      कर्जा लेते रहे, अपनी जेब भरते रहे, विकास के नाम पर जनता का मूर्ख  बनाते रहे, और अपने कर्मो का फल आज दिख रहा है तो आरोप मोदी पर लगाते है, में एक सामान्य इंसान हु, और राजनीति करनी मुझे नही आती और कांग्रेस से मुझे सख्त नफरत है और उसका पक्ष लेने वाले के में हमेसा खिलाफ रहूंगा क्योंकि मेरे पास कांग्रेस से नफरत के एक नही हज़ार वजह है।

रविवार, 16 सितंबर 2018

तलाक.....


राधिका और नवीन को आज तलाक के कागज मिल गए थे। दोनो साथ ही कोर्ट से बाहर निकले। दोनो के परिजन साथ थे और उनके चेहरे पर विजय और सुकून के निशान साफ झलक रहे थे। चार साल की लंबी लड़ाई के बाद आज फैसला हो गया था।
दस साल हो गए थे शादी को मग़र साथ मे छः साल ही रह पाए थे। चार साल तो तलाक की कार्यवाही में लग गए। राधिका के हाथ मे दहेज के समान की लिस्ट थी जो अभी नवीन के घर से लेना था और नवीन के हाथ मे गहनों की लिस्ट थी जो राधिका से लेने थे।

साथ मे कोर्ट का यह आदेश भी था कि नवीन  दस लाख रुपये की राशि एकमुश्त राधिका को चुकाएगा। राधिका और नवीन दोनो एक ही टेम्पो में बैठकर नवीन के घर पहुंचे।  दहेज में दिए समान की निशानदेही राधिका को करनी थी। इसलिए चार वर्ष बाद ससुराल जा रही थी। आखरी बार बस उसके बाद कभी नही आना था उधर।
सभी परिजन अपने अपने घर जा चुके थे। बस तीन प्राणी बचे थे।नवीन, राधिका और राधिका की माता जी।

नवीन घर मे अकेला ही रहता था।  मां-बाप और भाई आज भी गांव में ही रहते हैं। राधिका और नवीन का इकलौता बेटा जो अभी सात वर्ष का है कोर्ट के फैसले के अनुसार बालिग होने तक वह राधिका के पास ही रहेगा। नवीन महीने में एक बार उससे मिल सकता है।

घर मे परिवेश करते ही पुरानी यादें ताज़ी हो गई। कितनी मेहनत से सजाया था इसको राधिका ने। एक एक चीज में उसकी जान बसी थी। सब कुछ उसकी आँखों के सामने बना था।एक एक ईंट से  धीरे धीरे बनते घरोंदे को पूरा होते देखा था उसने। सपनो का घर था उसका। कितनी शिद्दत से नवीन ने उसके सपने को पूरा किया था। नवीन थकाहारा सा सोफे पर पसर गया। बोला "ले लो जो कुछ भी चाहिए मैं तुझे नही रोकूंगा" राधिका ने अब गौर से नवीन को देखा। चार साल में कितना बदल गया है। बालों में सफेदी झांकने लगी है। शरीर पहले से आधा रह गया है। चार साल में चेहरे की रौनक गायब हो गई।

वह स्टोर रूम की तरफ बढ़ी जहाँ उसके दहेज का अधिकतर  समान पड़ा था। सामान ओल्ड फैशन का था इसलिए कबाड़ की तरह स्टोर रूम में डाल दिया था। मिला भी कितना था उसको दहेज। प्रेम विवाह था दोनो का। घर वाले तो मजबूरी में साथ हुए थे।
प्रेम विवाह था तभी तो नजर लग गई किसी की। क्योंकि प्रेमी जोड़ी को हर कोई टूटता हुआ देखना चाहता है।
बस एक बार पीकर बहक गया था नवीन। हाथ उठा बैठा था उसपर। बस वो गुस्से में मायके चली गई थी।
फिर चला था लगाने सिखाने का दौर । इधर नवीन के भाई भाभी और उधर राधिका की माँ। नोबत कोर्ट तक जा पहुंची और तलाक हो गया।

न राधिका लौटी और न नवीन लाने गया।

राधिका की माँ बोली" कहाँ है तेरा सामान? इधर तो नही दिखता। बेच दिया होगा इस शराबी ने ?"  "चुप रहो माँ"
राधिका को न जाने क्यों नवीन को उसके मुँह पर शराबी कहना अच्छा नही लगा।

फिर स्टोर रूम में पड़े सामान को एक एक कर लिस्ट में मिलाया गया।  बाकी कमरों से भी लिस्ट का सामान उठा लिया गया। राधिका ने सिर्फ अपना सामान लिया नवीन के समान को छुवा भी नही।  फिर राधिका ने नवीन को गहनों से भरा बैग पकड़ा दिया।  नवीन ने बैग वापस राधिका को दे दिया " रखलो, मुझे नही चाहिए काम आएगें तेरे मुसीबत में ।" गहनों की किम्मत 15 लाख से कम नही थी।  "क्यूँ, कोर्ट में तो तुम्हरा वकील कितनी दफा गहने-गहने चिल्ला रहा था"

"कोर्ट की बात कोर्ट में खत्म हो गई, राधिका। वहाँ तो मुझे भी दुनिया का सबसे बुरा जानवर और शराबी साबित किया गया है।" सुनकर राधिका की माँ ने नाक भों चढ़ाई।

"नही चाहिए। वो दस लाख भी नही चाहिए" "क्यूँ?" कहकर नवीन सोफे से खड़ा हो गया। "बस यूँ ही" राधिका ने मुँह फेर लिया। "इतनी बड़ी जिंदगी पड़ी है कैसे काटोगी? ले जाओ,,, काम आएगें।" इतना कह कर नवीन ने भी मुंह फेर लिया और दूसरे कमरे में चला गया। शायद आंखों में कुछ उमड़ा होगा जिसे छुपाना भी जरूरी था।

राधिका की माता जी गाड़ी वाले को फोन करने में व्यस्त थी। राधिका को मौका मिल गया। वो नवीन के पीछे उस कमरे में चली गई। वो रो रहा था। अजीब सा मुँह बना कर।  जैसे भीतर के सैलाब को दबाने दबाने की जद्दोजहद कर रहा हो। राधिका ने उसे कभी रोते हुए नही देखा था। आज पहली बार देखा न जाने क्यों दिल को कुछ सुकून सा मिला।

मग़र ज्यादा भावुक नही हुई। सधे अंदाज में बोली "इतनी फिक्र थी तो क्यों दिया तलाक?"

"मैंने नही तलाक तुमने दिया"  "दस्तखत तो तुमने भी किए" "माफी नही माँग सकते थे?" "मौका कब दिया तुम्हारे घर वालों ने। जब भी फोन किया काट दिया।" "घर भी आ सकते थे"?

"हिम्मत नही थी?"  राधिका की माँ आ गई। वो उसका हाथ पकड़ कर बाहर ले गई। "अब क्यों मुँह लग रही है इसके? अब तो रिश्ता भी खत्म हो गया"

मां-बेटी बाहर बरामदे में सोफे पर बैठकर गाड़ी का इंतजार करने लगी।  राधिका के भीतर भी कुछ टूट रहा था। दिल बैठा जा रहा था। वो सुन्न सी पड़ती जा रही थी। जिस सोफे पर बैठी थी उसे गौर से देखने लगी। कैसे कैसे बचत कर के उसने और नवीन ने वो सोफा खरीदा था। पूरे शहर में घूमी तब यह पसन्द आया था।" फिर उसकी नजर सामने तुलसी के सूखे पौधे पर गई। कितनी शिद्दत से देखभाल किया करती थी। उसके साथ तुलसी भी घर छोड़ गई।

घबराहट और बढ़ी तो वह फिर से उठ कर भीतर चली गई। माँ ने पीछे से पुकारा मग़र उसने अनसुना कर दिया। नवीन बेड पर उल्टे मुंह पड़ा था। एक बार तो उसे दया आई उस पर। मग़र  वह जानती थी कि अब तो सब कुछ खत्म हो चुका है इसलिए उसे भावुक नही होना है।

उसने सरसरी नजर से कमरे को देखा। अस्त व्यस्त हो गया है पूरा कमरा। कहीं कंही तो मकड़ी के जाले झूल रहे हैं। कितनी नफरत थी उसे मकड़ी के जालों से? फिर उसकी नजर चारों और लगी उन फोटो पर गई जिनमे वो नवीन से लिपट कर मुस्करा रही थी। कितने सुनहरे दिन थे वो।

इतने में माँ फिर आ गई। हाथ पकड़ कर फिर उसे बाहर ले गई।

बाहर गाड़ी आ गई थी। सामान गाड़ी में डाला जा रहा था। राधिका सुन सी बैठी थी। नवीन गाड़ी की आवाज सुनकर बाहर आ गया।

अचानक नवीन कान पकड़ कर घुटनो के बल बैठ गया।
बोला--" मत जाओ,,, माफ कर दो" शायद यही वो शब्द थे जिन्हें सुनने के लिए चार साल से तड़प रही थी। सब्र के सारे बांध एक साथ टूट गए। राधिका ने कोर्ट के फैसले का कागज निकाला और फाड़ दिया ।

और मां कुछ कहती उससे पहले ही लिपट गई नवीन से। साथ मे दोनो बुरी तरह रोते जा रहे थे।

दूर खड़ी राधिका की माँ समझ गई कि कोर्ट का आदेश दिलों के सामने कागज से ज्यादा कुछ नही।
काश उनको पहले मिलने दिया होता?

रविवार, 17 जून 2018

बुधवार, 6 जून 2018

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