शुक्रवार, 13 मार्च 2020

मज़ाक तक....


जैसलमेर और बीकानेर बस रूट पर....
बीच मे एक बड़ा सा गाँव है जिसका नाम है नाचना

वहाँ से बस आती है तो लोग कहते है कि 
नाचने वाली बस आ गयी 😎 
कंडक्टर भी बस रुकते ही चिल्लाता..
नाचने वाली सवारियाँ उतर जाएं बस आगे जाएगी 😎

इमरजेंसी में रॉ का एक नोजवान अधिकारी जैसलमेर आया 
रात बहुत हो चुकी थी,
वह सीधा थाने पहुँचा और ड्यूटी पर तैनात सिपाही से पूछा 
थानेदार साहब कहाँ है?

सिपाही ने जवाब दिया थानेदार साहब नाचने गये है,😎

अफसर का माथा ठनका उसने पूछा डिप्टी साहब कहाँ है ,
सिपाही ने विनम्रता से जवाब दिया-
हुकुम 🙏🏻 डिप्टी साहब भी नाचने पधारे है😎

अफसर को लगा सिपाही अफीम की पिन्नक में है, उसने एसपी के निवास पर फोन📞 किया।

एसपी साहब है?
जवाब मिला नाचने गये है 
लेकिन नाचने कहाँ गए है ये तो बताइए ?

बताया न नाचने गए है,सुबह तक आ जायेंगे।

कलेक्टर के घर फोन लगाया वहाँ भी यही जवाब मिला,साब तो नाचने गये है

अफसर का दिमाग खराब हो गया, ये हो क्या रहा है इस सीमावर्ती जिले में ओर वो भी इमरजेंसी में।
पास खड़ा मुंशी ध्यान से सुन रहा था और वो बोला हुकुम बात ऐसी है की दिल्ली से आज कोई मिनिस्टर साहब नाचने आये है।
इसलिये सब हाकिम लोग भी नाचने पधारे है
😜💃🏻😜💃🏻😜💃🏻😜

शुक्रवार, 28 फ़रवरी 2020

कवि हलवाई की दुकान पे....

एक बार एक कवि हलवाई की दुकान पहुँचे, जलेबी दही ली और वहीं खाने बैठ गये। 

इतने में एक कौआ कहीं से आया और दही की परात में चोंच मारकर उड़ चला।
पर हलवाई ने उसे देख लिया। हलवाई ने कोयले का एक टुकड़ा उठाया और कौए को दे मारा।
कौए की किस्मत ख़राब, कोयले का टुकड़ा उसे जा लगा और वो मर गया।

कवि महोदय ये घटना देख रहे थे । कवि हृदय जगा । जब वो जलेबी दही खाने के बाद पानी पीने पहुँचे तो उन्होने कोयले के टुकड़े से एक पंक्ति लिख दी।
कवि ने लिखा 
"काग दही पर जान गँवायो"

तभी वहाँ एक लेखपाल महोदय जो कागजों में हेराफेरी की वजह से निलम्बित हो गये थे, पानी पीने पहुँचे। कवि की लिखी पंक्तियों पर जब उनकी नजर पड़ी तो अनायास ही उनके मुँह से निकल पड़ा  , कितनी सही बात लिखी है! क्योंकि उन्होने उसे कुछ इस तरह पढ़ा-
"कागद ही पर जान गँवायो"

तभी एक मजनू टाइप आदमी भी पिटा पिटाया सा वहाँ पानी पीने पहुँचा। उसे भी लगा कितनी सच्ची और सही बात लिखी है काश उसे ये पहले पता होती, क्योंकि उसने उसे कुछ यूँ पढ़ा था-
"का गदही पर जान गँवायो"

सो तुलसीदास जी की लाइनें देखिए।

"जाकी रही भावना जैसी
प्रभु मूरत देखी तिन तैसी"


शनिवार, 22 फ़रवरी 2020

पिता जी पिछड़ रहे हैं....

पता नहीं क्यों पिताजी हमेशा (माँ की तुलना में) पिछड़ रहे हैं।

1. माँ 9 महीने तक अपनी कोख में पालन करती है, पिताजी 25 साल तक, दोनों बराबर हैं, फिर भी पता नहीं क्यों पिताजी पिछड़ रहे हैं।

2. माँ परिवार के लिए पारिश्रमिक के बिना काम करती है, पिताजी अपना सारा वेतन परिवार के लिए खर्च करते हैं, उनके दोनों प्रयास बराबर हैं, फिर भी पता नहीं क्यों पिताजी पिछड़ रहे हैं।

3. माँ , आप जो चाहे वो पका कर खिलाती है, पिताजी आप जो चाहते हैं, खरीद लेते हैं, दोनों का प्यार बराबर है, लेकिन माँ का प्यार बेहतर है। पता नहीं क्यों पिताजी पिछड़ रहे हैं।

4. जब आप फोन पर बात करते हो, तो आप पहले माँ से बात करना चाहते हो, अगर आपको कोई चोट लगती है, तो आप पहले 'माँ' के लिए रोते हो। आपको केवल पिताजी की याद आती है जब आपको उनकी आवश्यकता होगी, लेकिन क्या पिताजी को कभी बुरा लगा था कि आप उन्हें पहली बार में याद नहीं करते? जब बच्चों से प्यार प्राप्त करने की बात आती है, तो पीढ़ियों से, हम देखते हैं कि पिताजी हमेशा पिछड़ रहे हैं।

5. अलमारी (कपाट) में बच्चों के लिए और पत्नी के लिए कई रंगीन साड़ियों व कपड़ों से भरा होगा, लेकिन पिताजी के कपड़े बहुत कम होते हैं, वह अपनी जरूरतों के बारे में परवाह नहीं करते हैं, फिर भी यह नहीं जानते कि पिताजी क्यों पिछड़ रहे हैं ।

6. माँ के पास सोने के कई गहने हैं, लेकिन पिताजी के पास सोने की सिर्फ एक चैन है कभी पहन लेते है कभी निकाल के रख देते हैं।

7. परिवार की देखभाल करने के लिए पिताजी बहुत मेहनत करते हैं, लेकिन जब पहचान पाने की बात आती है, तो वे हमेशा पिछड़ जाते हैं।

8. माँ कहती है, हमें इस महीने कॉलेज-ट्यूशन का भुगतान करने की आवश्यकता है, कृपया त्योहार पर मेरे लिए साड़ी न खरीदें। जब बच्चे अपने पसंदीदा पकवान का आनंद लेते हैं और पिताजी के पसंद का कुछ नही शुगर के मरीज है फिर भी दाल चावल खा लेते हैं। दोनों का प्यार बराबर है, फिर भी पता नहीं क्यों पिताजी पिछड़ रहे हैं।

9. जब माता-पिता बूढ़े हो जाते हैं, तो बच्चे कहते हैं, माँ तो घर के कामों में कम से कम मदद करती ही हैं, लेकिन पिताजी हमारे लिए बेकार हैं।

पिताजी पीछे हैं या सबसे पीछे, क्योंकि वह परिवार की रीढ़ हैं। उनकी वजह से ही हम खड़े होने में सक्षम हैं। शायद, यही कारण है कि वह पिछड़ रहे है ...... 

Shyam Vishwakarma....

सोमवार, 3 फ़रवरी 2020

मुख्यमंत्री चौधरी चरण सिंह जी की बात.....

3 अप्रैल 1967 को चौधरी चरण सिंह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे .....,
उस समय उत्तर प्रदेश की विधानसभा में केवल दो ही मुसलमान विधायक थे ! 

 एक दिन विधानसभा भवन में एक कमाल यूसुफ नाम के विधायक ने चौधरी चरण सिंह से कहा कि चौधरी साहब आप केवल हिंदुओं की वोटों से ही मुख्यमंत्री नहीं बने हो, हमने भी तुम्हें वोट दी हैं..., अब हमारी भी कुछ मांग हैं, वह आपको माननी पड़ेंगी ! 

चौधरी साहब ने कहा यदि मैं तुम्हारी मांग मैं ना मानूं तो क्या करोगे....?
 उस मुस्लिम विधायक ने कहा कि मुसलमान जन्मजात लड़ाकू होता है, बहादुर होता है, यदि तुम हमारी मांग स्वीकार नहीं करोगे तो हम लड़ करके अपनी मांगे मनवायेंगे ! 

चौधरी साहब ने कहा  कि नीचे बैठ जा वरना जितना ऊपर खड़ा है उतना ही तुझे जमीन में उतार दूंगा ! तुम बहादुर कब से हो गए ? मुसलमान बहादुर बिल्कुल नहीं होता, एक नंबर का कायर होता है ! तुम यदि बहादुर होते तो मुसलमान बनते ही क्यों, यह जितने भी हिंदुओं से मुसलमान बने हैं, वह डर की वजह से बने हैं ! जो तलवार की नोक को देखकर ही अपने धर्म को छोड़ सकता है और विधर्मी बन सकता है वह बहादुर कैसे हो सकता है ?

 बहादुर तो हम हैं कि हमारे पूर्वजों ने 700 साल तक मुसलमानों के साथ तलवार बजाई है ! लाखों ने अपना बलिदान दिया है ! लेकिन हम  मुसलमान नहीं बने, तो बहादुर हम हुए या तुम हुए ?  तलवार को देखते ही धर्म छोड़ बैठे आज तुम बहादुर हो..!  तुम्हें तो अपने आप को कायर कहना चाहिए, और जो भी हिंदुओं से बना हुआ मुसलमान है वो पक्का कायर है, क्योंकि तुमने इस्लाम को स्वीकार किया था, और मैं तुम्हारी एक भी मांग मानने वाला नहीं हूं। जो तुम्हें करना हो कर लेना,  मैं देखना चाहता हूं कि तुम कितने बहादुर हो।

धन्य हैं ऐसे मुख्य मंत्री !

शुक्रवार, 31 जनवरी 2020

शाहीन बाग़... गोली कांड.....

देशद्रोहियों का शाहीन बाग में नया तमाशा ....
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जामिया मे सैकड़ों की संख्या मे CAA विरोधी प्रदर्शनकारी निकलते है......इनके बीच मे से एक बहादुर बालक हाथ मे देसी तमंचा और एक दो कारतूस लेकर निकलता है...लगभग वॉक करते हुये फायर करता है...न्यूज मे दिखाये जा रहे घटना के वीडियो मे फायर के बाद भी कोई भगदड़ नही मचती....कैमरा तक नही हिलता है.......फायर से निकली गोली विधर्मी छात्र के ही हाथ मे लगती है......मै हूं राम का भक्त,मै तुम्हे आजादी दिलाऊंगा कह कर गोली चलाने वाला युवक पुलिस के आगे बढ़ते ही अपने हाथ मे पकड़ा कट्टा पुलिस को बड़ी सहूलियत से पकड़ा देता है....कोई अफरा तफरी नही...उधर घायल छात्र खतरे से बाहर हो जाता है और इधर फायर करने वाले का नाम गोपाल के रूप मे सामने आ जाता है.......पार्ट 1 समाप्त!!
पार्ट 2 शुरू...इसके तुरंत ...बाद कांग्रेस,आप के साथ भांड मीडिया एक सुर मे इस कथित गोलीकांड का आरोप बीजेपी पर मढ़ कर अनुराग ठाकुर के गोली मारो गद्दारों वाले बयान से जोड़ देती है..यानी बीजेपी पर जबरदस्त दोषारोपण...!!
हो सकता है कि मै गलत साबित हो जाऊं...लेकिन इस समय तो मै कजरी और फिरंगन के पेड स्क्रिप्ट रायटरों से इतना जरूर कहूंगा कि .....कम से कम इस बार तो हिंदुओं को बदनाम करके दिल्ली के चुनाव मे फायदा उठाने के लिये कोई नई कहानी गढ़ लेते......!!
दरअसल तुम सब मिल कर इतने ड्रामे परोस चुके हो कि तुम्हारी नौटंकी के अभिनेताओं के हाव भाव और उनके परफार्मेंस का स्टेज देख कर ही अब देश की जनता समझ जाती है कि इस नौटंकी को लिखने वाला कौन है....खैर अभी इस प्री मेच्योर स्टेज पर कुछ कहूंगा तो मेरे भाई बंधु ही मुझ पर भरोसा नही करेंगे....लेकिन इस घटना की जांच का परिणाम आने के बाद देख लीजियेगा कि जामिया की यह घटना भी कांगी और कजरी मे से ही किसी का....एक और पाप निकलेगा...पक्का बता रहा हूं...अब इस कथित घटना को भांड मीडिया के 24×7 वाले पार्ट 3 के मंचन द्वारा बहकाने वाली रिपोर्टिंग के झांसे मे देश और विशेष कर दिल्ली की जनता को नही आना है......जैसे देश को कांग्रेस जैसे संक्रमण से मुक्त किया जा रहा है वैसे ही 'आप' जैसी प्रदूषित हवा से दिल्ली को मुक्ति दिलाना हम सबकी प्राथमिकता होना चाहिये...!

शुक्रवार, 24 जनवरी 2020

राष्ट्रवादी विपक्ष...

राष्ट्रवादी विपक्ष कैसा होता है, #सत्य_घटना देख लो  :- 

1991 में भारत की अर्थव्यवस्था कंगाल हो गई थी तब #प्रधानमंत्री #नरसिंह राव ने 
#वित्तमंत्री #मनमोहन सिंह से बुलाकर पूछा सरकारी खजाने में कितने पैसे हैं ?
मनमोहन जी का उत्तर था, सिर्फ 9 दिन तेज चला सकते हैं इतना ही पैसा बचा है ।

इस पर नरसिंह राव जी बोले स्थिति से कैसे निपटा जाए ?
तब मनमोहन सिंह बोले देश के रुपए की कीमत 20% गिरानी पड़ेगी ।
नरसिंह राव की बोले ठीक है कैबिनेट की बैठक बुलाओ ,,,, तब मनमोहन जी उठे और अपने कक्ष की ओर जाने लगे !

फिर वह कदम दूर जाने के बाद वापस पलट कर आए और नरसिंह राव की से बोले कि अगर #कैबिनेट_बैठक बुलाई तो हमें #कठोर #निर्णय नहीं ले पाएंगे 

सभी मंत्री वोट बैंक एड्रेस करके नरसिंह राव जी ने मनमोहन जी से कहा कि ठीक है अभी आप अपने कक्ष में चाहिए,,, 
20 मिनट बाद मनमोहन जी को उनके कमरे में सचिव एक #चिट्ठी देकर गए और उस चिट्ठी में नरसिंह राव जी ने लिखा था "DONE"

बाद में जब पता चला कि 20 मिनट में ऐसा क्या हो गया था जो आपने कैबिनेट मीटिंग के बिना मनमोहन सिंह सहित सबको आश्चर्य में डाल कर हां कर दिया ।
तब नरसिंह राव जी ने कहा था कि मैंने अटल जी से बात कर ली थी और फिर #DONE कर दिया ।

 मतलब आप लोग यह देखिए कि उस समय उन्होंने अपनी #कैबिनेट_से_भी_ज्यादा_अटल_जी_पर_भरोसा किया क्योंकि उन्हें पता था अटल बिहारी जी वही बोलेंगे जो देश हित में होगा 🇮🇳

ऐसा होता है राष्ट्रवादी विपक्ष और उस कठोर निर्णय की घोषणा के बाद #बीजेपी ने विरोध आंदोलन नहीं किया बल्कि देश की अर्थव्यवस्था पटरी पर लाने के लिए तात्कालिक #कांग्रेस सरकार को पूरा समर्थन दिया 

#We_miss_you_ATAL_JI ??🙏
#जय हिंद 🤝 🇮🇳

गुरुवार, 23 जनवरी 2020

हम कुछ नही कहते


उनको ये शिकायत है के हम कुछ नहीं कहते...
अपनी तो ये आदत है के हम कुछ नहीं कहते...

मजबूर बहुत करता है ये दिल तो जुबां को...
कुछ ऐसी ही हालत है के हम कुछ  नहीं कहते...

कहने को बहुत कुछ था, अगर कहने पे आते...
दुनिया की इनायत है के हम कुछ नहीं कहते...

कह देते तो हो जाता हंगामा... हो जाता तमाशा...
इसीलिए हम कुछ नहीं कहते... हम कुछ नहीं कहते...

https://twitter.com/Shyam_v_v/status/1220020175124168709?s=19

रविवार, 15 सितंबर 2019

छुट्टी विश्वकर्मा / जयंती

छुट्टी
हां छुट्टी तो होनी चाहिए पर कब?
विश्वकर्मापूजा को या विश्वकर्माजयंती(प्रकट दिन)  को ?

कुछ लोगों का मानना है विश्वकर्मा पूजा (17 September) को छुट्टी होनी चाहिए पर कुछ लोगों का मानना है विश्वकर्मा जयंती (प्रकट दिन) (माघ शुक्ल पक्ष, त्रयोदसी) के दिन छुट्टी होनी चाहिए। जबकि हर दूसरे साल विश्वकर्मा पूजा के समय #पितृपक्ष होता है। छुट्टी की मांग विश्वकर्मा जयंती का करना  चाहिए। शास्त्रानुसार जयंती उपयुक्त रहेगा, और विधि विधान से पूजन भी हो सकता है।

(बहुत दिन से देख रहा हूँ छूट्टी की मांग हो रही है, पर तर्क के साथ कोई भी मांग नहीं कर रहा है छुट्टी की मांग करना है तो हिन्दू धर्मानुसार मांग होनी चाहिए... तिथि अनुसार होना चाहिए... मुंडन करना है तो तिथि, शादी करनी है तो तिथि, हमारे तीज तेव्हार तिथि अनुसार )

सनातन धर्मानुसार विश्वकर्मा जयंती (प्रकट दिन) की छुट्टी होनी चाहिए।

रविवार, 14 जुलाई 2019

अंत मे हम दोनों ही होंगे...

भले ही झगड़े, गुस्सा करे,
एक दूसरे पर टूट पड़े
एक दूसरे पर दादागिरि करने के
लिये, अन्त में हम दोनों ही होंगे


जो कहना हे, वह कह ले,
जो करना हे, वह कर ले
एक दुसरे के चश्मे और
लकड़ी ढूँढने में,
अन्त में हम दोनों ही होंगे


मैं रूठूं तो तुम मना लेना,
तुम रूठो ताे मै मना लूँगा
एक दुसरे को लाड़ लड़ाने के लिये,
अन्त में हम दोनों ही होंगे


आँखे जब धुँधली होंगी,
याददाश्त जब कमजोर होंगी
तब एक दूसरे को एक दूसरे
मे ढूँढने के लिए,
अन्त में हम दोनों ही होंगे


घुटने जब दुखने लगेंगे,
कमर भी झुकना बंद करेगी
तब एक दूसरे के पांव के नाखून काटने के लिए,
अन्त में हम दोनों ही होंगे


“मेरी हेल्थ रिपोर्ट एक दम नॉर्मल
है, आइ एम आलराईट
ऐसा कह कर ऐक दूसरे को
बहकाने के लिए,
अन्त में हम दोनों ही होंगे


साथ जब छूट जायेगा,
बिदाई की घड़ी जब आ जायेगी
तब एक दूसरे को माफ करने के लिए,
अन्त में हम दोनों ही होंगे…


सोमवार, 29 अप्रैल 2019

दिशाशूल विचार यात्रा...

दिशाशूल विचार यात्रा करने से पहले जरूर जान लें – दिशाशूल के ऊपर एक पुरानी कहावत है।


सोम शनीचर पूरब न चालू। मंगल बुध उत्तर दिश कालू।
रवि शुक्र जो पश्चिम जाय। हानि होय पथ सुख नहीं पाए।
बीफे दक्खिन करे पयाना। फिर नहिं समझो ताको आना।

  • सोमवार और शनिवार को पूर्व दिशा की ओर यात्रा नहीं करनी चाहिए।
  • मंगलवार और बुधवार को उत्तर दिशा की ओर यात्रा नहीं करनी चाहिए।
  • रविवार और शुक्रवार को पश्चिम दिशा दिशा की ओर यात्रा नहीं करनी चाहिए।
  • वीरवार या बृहस्पति को दक्षिण दिशा की और यात्रा करना बहुत ही खतरनाक होता है।

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