शनिवार, 18 फ़रवरी 2012

मुझे भी भ्रष्टाचार कर लेने दो..........


भाई साहब मैं मर जाऊंगा
मेरी धड़कनें रुक जायेंगी
सांस लेना मुश्किल हो जाएगा
मेरी बीवी घर से निकाल देगी
शान-सौकत सब चली जायेगी
किसी को मुंह दिखाने के लायक नहीं रहूँगा
मुझे करने दो, थोड़ा-बहुत ही सही
पर मुझे भ्रष्टाचार कर लेने दो........$...........
.........
मैं भ्रष्ट हूँ, भ्रष्टाचारी हूँ
इरादतन भ्रष्टाचार का आदि हो गया हूँ
आज तक एक भी ऐसा काम नहीं किया
जिसमे भ्रष्टाचार न किया हो
लोग मेरे नाम की मिसालें देते हैं
मुझे जीने दो, मेरी हाय मत लो
मेरी हाय तुम्हें चैन से बैठने नहीं देगी
क्यों, क्योंकि मैं एक ईमानदार भ्रष्टाचारी हूँ........$.........
.........
मेरी नस नस में भ्रष्टाचार दौड़ रहा है
दिल की धड़कनें भ्रष्टाचार से चल रही हैं
मान लो, मेरी बात मान लो
मुझे, सिर्फ मुझे, भ्रष्टाचार कर लेने दो
तुम हाय से बच जाओगे
और मेरी दुआएं भी मिलेंगी
यही मेरी पहली और अंतिम अर्जी है
क्यों, क्योंकि मैं एक ईमानदार भ्रष्टाचारी हूँ........$..........

शुक्रवार, 17 फ़रवरी 2012

गाँव मेरा मुझे याद आता है.............


भागता मैं रहा इस शहर से उस शहर ..............
पर कोई था ............................
जो मुझको बुलाता रहा.............
गाँव मेरा मुझे याद आता रहा.............
एक प्यारा सा गाँव..
जिसमें पीपल की छाँव,
पेड़ जामुन के कुछ
खेत सरसों के कुछ
मीठा पानी कुँए का
मुझको बुलाता रहा .................
गाँव मेरा मुझे याद आता रहा.............
धान की बालियाँ..............
महकी अमराइयाँ.............
माटी की सौंधी महक............$.............
बीता बचपन मुझे.............
बुलाता रहा ..................
गाँव मेरा मुझे याद आता रहा..
माँ के आँचल का प्यार
दादी का दुलार................
वो सावन के झूले,
वो मीठी सी गुझिया
जिसमें कितना था लाड़...............
वो होली का फाग.................
रंग होली का मुझको बुलाता रहा .........
गाँव मेरा मुझे याद आता रहा..............
गाँव मेरा मुझे बुलाता रहा.............
गाँव मेरा मुझे याद आता रहा.............


हौसला बुलंद कर ले..............

रख हौसला खुद पे.................
यकीं एकबार कर ले.............
सामने तेरे खुला आकाश है..........
जीतने की कोशिश तू बस एकबार कर ले ...........

रास्तें की ठोकरें क्या रोक पाएंगी तुझे?
चल उठ! अपनी जीत का आगाज कर दे.............
स्वप्न जो आधे-अधूरे थे कभी...............
चल जाग जा तू नींद से...............
आज अपनी जीत का ऐलान कर दे,...............


है कंटीली राह तो क्या?
हार कर रुकना नही है तुझे...........
चल उठ!जीत का सेहरा तू अपने नाम कर ले..........

सोमवार, 13 फ़रवरी 2012

दिमाक और मन..........


नयी इच्छाओँ ने जन्म लेना
शुरू कर दिया है...
ये कैसे हो गया?
अभी तो कई पुरानी इच्छाएँ,
अपने साकार होने की
प्रतीक्षा कर रही हैँ...
अब इतनी सारी इच्छाएँ
कैसे पूरी होँगी?
दिमाग ने सोचने से
मना कर दिया है,
कह रहा है- "मन से जन्मी इच्छाएँ,
मैँ नहीँ सुलझाऊँगा.."
और मन कह रहा है-
"फिक्र मत करना और सबकुछ
परिस्थितियोँ पर छोड़ देना,
क्योँकि ये परिस्थितियाँ
या तो इच्छाएँ पूरी कर देँगी
या फिर स्वत: ही उन्हेँ दबा देँगी.."
अब सोच रहा हूँ कि
क्योँ ना अपनी नयी-पुरानी इच्छाओँ के साथ,
करूँ परिस्थितियोँ का इंतजार...
आखिर,
परिस्थितियोँ पर ही तो निर्भर है,
इन इच्छाओँ की परिणीती............

मंगलवार, 17 जनवरी 2012

उतावला मन..........


मन बहुत उतावला होता है |

इसमे न जाने कितने सवाल उठते है या जबाब मिलते है |

चाहे उनमे मै स्वयं ही घिरा हूं या फ़िर समाज या देश के प्रति मेरी उदासीनता या फ़िर जिम्मेदारी |

.

आप भी मेरी इस कशमकश के साथी हैं,

साथ चलकर या अपनी प्रतिक्रिया, विचार और राय के साथ् |

मेरे मन मे आज क्या है लिख दूँ पर हर पल न जाने किस ख्यालों में खोया रहता हूँ |





.

सोमवार, 16 जनवरी 2012

जिंदगी का अनुभव.......सत्य......

ज़िन्दगी के राह से अक्सर गुजरते हुये मैने अपने अनुभव से बहुत सी बाते समझी है ऐसा मै मानता हुं अब ये कहा तक सही है या गलत है
ये तो सदियो से वक्त पर छोडते आये है, जैसे-जैसे बाते जहन मे आती है मै आपसे कहता रहूंगा क्योकि जब तक जहन से बाते बाहर न आ जाये तब तक एक बेखुदी सी छाई रहती है...............

अक्सर ये सवाल जहन मे आता है मै कौन हूं और कई बाते सोचने लगता है ये जहन, यदि ये मान कर चले कि मेरा नाम " श्याम " है तो ये मेरे शरीर का नाम है और उस शरीर से मै अपने आप को प्रस्तुत करता हूं मगर फ़िर एक बात जहन मे आती है कि शरीर भी अपना नही है ये पंचतत्व से बना है और उस मे विलीन हो जायेगा ऐसा शास्त्र मे लिखा है,,,, यहां पर ये बात आती है कि शरीर से मै प्रस्तुत होता हूं लेकिन शरीर मेरा नही है वो इन तत्वो से बना है और नाम देने से मजहब का पता चलता है इस लिये मै सिर्फ़ शरीर हुं और विचार मेरे है जो कि इस शरीर की संपत्ति है वही मेरी दौलत है क्योकि उसी
विचार के माध्यम से आप मुझे जानते है कि ये व्यक्ति " श्याम " है.
मेरा ये मानना है कि शरीर या किसी अस्तित्व को हम सिर्फ़ विचारो के आधार पर ही समझते है और उन्हे आधारो के माध्यम से नज़रिया तय होता है, यहां पर सोच और नज़र के दायरे पर ही इन्सान का व्यक्तित्व निर्भर करता है..................

अब इन सब बातो को जान लेने के बाद अक्सर मै जब नये-नये लोगो से मिलता हूं तो ये देखने की कोशिश करता हूं कि क्या ये आदमी उस स्तर से सोच सकता है अपने बारे और अपने परिवार के बारे मे या नही क्योकि हर व्यक्ति की सोच मे परिवेश का असर होता है कि वो किस प्रकार के माहौल मे पला-बढा है, और कितना धीरज के साथ सोचता है अक्सर लोग पहले से बनी हुई धारणाओ के आधार पर ही सोचते है अर्थात जरा गंभीरता से नही सोचते आनन-फ़ानन मे जो रास्ता पूर्व धारणा से निर्मित है उसी पर चलते आ रहे है एक परम्परा को ही दोहराते आ रहे है आखिर पहले के हालात और अब के हालात मे काफ़ी फ़र्क है तब की धारणाओ को अब अमल मे लाते रहना कितना सार्थक है यदि तब हालात समाज उतने उन्नतशील नही थे, मगर अब हम उतने उन्नतशील है मगर फ़िर भी हम आज के हालातो के अनुसार नही सोचना चाहते पता नही क्यो ?

शुक्रवार, 16 दिसंबर 2011

मैं तुम्हें भूल गया हूँ.......

ऐ दोस्त........$........

मैं तुम्हें भूल गया हूँ
या यूँ कहूँ कि तुम्हें याद ही नहीं करता
न जाने क्यूँ दिल ही नहीं करता..........

तुमने भी कोशिश की होगी भूल जाने की मुझे,
याद न आने की मुझे तुम्हारी कोशिश साकार कर रहा हूँ
तुम्हें भूल कर, तुम्हें याद कर रहा हूँ.........

अब तो उम्र भी गुजर गयी, रोज की आदतों की तरह
फिर एक दिन गुजर गया, रोज के रास्तों की तरह
तुम्हें भी न याद किया, खुद की साँसों की तरह .........

रविवार, 11 दिसंबर 2011

कुछ उलझने होती हैं........


कई बार मन मैं कुछ उलझने होती हैं कुछ ख्वाब होते हैं जो हर पल सोते जागते हमारा साथ देते हैं ख्वाब सच हो जाए तो बात ही क्या होती है पर जब ख्वाब सच करने के लिए कुछ निर्णय लेने होते हैं असली मुश्किल तब ही शुरू होती हैं पर ना जाने क्यूं आज मेरा मन बहुत ख़ाली ख़ाली सा लग रहा है जिसे जाना था वो चला गया, जिसे रहना था वो रह गया. हो सकता था सब कुछ जैसे चल रहा था और कई दिन चलता रहता...कुछ दिन क्या आजीवन चलता रहता पर मैं नही चाहता था जीवन में कभी मुड़कर देखना पड़े तो मुझे पछतावा हो मैने कोशिश क्यूं नही की....मैने कोशिश की भी और फिर भी मन मैं कुछ ख़ाली सा है क्या है पता नही... मैं ख़ुश हूँ कुछ ठहर सा गया है मेरे मन में इतनी शांति कहीं कोई आहट नही कभी- कभी डर सा लगने लगता है ज़िंदगी में किसी के साथ होने से हौसला बढ़ता है ना साथ होने से रुकती है ...मैं पूरी तरह आश्वस्त हूँ...... खुश हूँ जो है जितना है....... पर मै बहुत खुश हूँ.........

सोमवार, 21 नवंबर 2011

पिता.........


माँ घर का गौरव तो पिता घर का अस्तित्व होते है......
माँ के पास अश्रुधारा तो पिता के पास संयम होता है.......

दोनों समय भोजन माँ बनाती है तो जीवन भर भोजन की ब्यवस्था
करने वाले पिता को हम सहज ही भूल जाते है.......

कभी लगी ठोकर या चोट तो " ओ माँ " ही मुंह से निकलता है......
लेकिन रास्ता पर करते समय कोई ट्रक पास आकर ब्रेक लगाये तो
"बाप रे " यही मुहं से निकलता है.......

क्यों की छोटे छोटे संकठो के लिए माँ है......
पर बड़े संकट आने पर पिता ही याद आते है.....

पिता एक वटवृक्ष हैं जिसकी शीतल छाँव में सम्पूर्ण
परिवार सुख से रहता है...........

मंगलवार, 1 नवंबर 2011


प्रिय मित्र !
हिन्दी के लिए एक अनुरोध .........
Android 3.2 (टैबलेट वाले हनीकॉम्ब का नवीनतम संस्करण) जारी हो गया है पर हिन्दी समर्थन नहीं।
तीन साल हो गये ऍण्ड्रॉइड में हिन्दी का इन्तजार करते, इस इन्तजार में बूढ़े न हो जायें।
आम हिन्दी उपयोक्ता ऍण्ड्रॉइड वाले फोन तथा टैबलेट खरीदना चाहता है पर हिन्दी समर्थन न होने से मन मसोस कर रह जाता है। खैर इसमें गूगल की गलती नहीं हम भारतीयों की है। पहले अरबी का समर्थन भी नहीं था, 2010 में इसका बग दर्ज किये जाने पर कुछ महीनों में ही उसे कोई 5000 वोट मिले तो अगली रिलीज में अरबी शामिल कर ली गयी। जबकि हिन्दी सम्बन्धी बग 2008 से दर्ज हैं पर वोट सैकड़े से आगे जाते ही नहीं, पर्याप्त वोट न होने से वो प्राथमिकता सूची में नहीं आता। अब बताइये दोष किसका है गूगल का या हमारा? आम फोन, टैबलेट उपयोक्ता को छोड़ भी दें तो नेट पर हजारों हिन्दी पढ़ने-लिखने वाले होने पर भी हम वहाँ जाकर वोट करने का भी जहमत नहीं उठा सकते।


अब तक एक इश्यू को अधिकतम 570 के करीब वोट मिले हैं। अगर वोट हजारों में पहुँच जायें तो प्राथमिकता सूची में ऊपर जाने पर गूगल बाबा इस तरफ जरुर ध्यान देंगे। मेरे विचार से हमें नेट पर सभी माध्यमों (समूह, ट्विटर, फेसबुक, ब्लॉग आदि) का उपयोग करके इस काम के लिये वोट जुटाने चाहिये। अपने अधिक से अधिक मित्रों को इसके लिये वोट करने को कहें। इस प्रकार के कुछ पुराने इश्यू यहाँ देखें।




कृपया सभी बग्स (links) पर एक एक कर जाकर वोट करें। वोट करने के लिये ऊपर बायें कोने में स्टार पर क्लिक करें यह पीला हो जायेगा। कमेन्ट करने से ज्यादा जरूरी है .....स्टार को अधिक से अधिक संख्या में लोगों द्वारा पीला करना।

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