रविवार, 1 दिसंबर 2013

यादें......

ता उम्र मैंने हिचकियों में गुजार दी है ।
मैं भी याद ही करता रहा,
कसम तो मैंने खायी थी
पर तुम क्यूँ नहीं आई ।

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